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मेथी

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मेथी के मुख्य फायदे हैं  रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) को नियंत्रित करना, पाचन सुधारना, वजन घटाने में मदद करना, जोड़ों के दर्द से राहत देना, कोलेस्ट्रॉल कम करना, त्वचा और बालों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना, तथा महिलाओं में हार्मोनल संतुलन और मासिक धर्म संबंधी परेशानियों को दूर करना ।   स्वास्थ्य संबंधी फायदे रक्त शर्करा नियंत्रण:   मेथी ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करती है, जिससे डायबिटीज के मरीजों को फायदा हो सकता है।   पाचन सुधार:   इसमें मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है और कब्ज, गैस तथा एसिडिटी जैसी पेट की समस्याओं से राहत दिलाता है।   वजन प्रबंधन:   मेथी वजन कम करने और शरीर में फैट को कम करने में सहायक हो सकती है।   जोड़ों के दर्द में आराम:   मेथी वात रोगों, जैसे जोड़ों के दर्द, कमर दर्द और साइटिका में लाभकारी है।   कोलेस्ट्रॉल कम करना:   मेथी का सेवन कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है, जिससे हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है।   त्वचा और बालों का स्वास्थ्य:   मेथी त्वचा को चमकदार बना...

दाल चीनी

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दालचीनी  एक सुगंधित मसाला है जो सिनामोमम नामक पेड़ की भीतरी छाल से प्राप्त होता है . यह मीठे और नमकीन व्यंजनों में उपयोग किया जाता है और इसका उपयोग  औषधियों  में भी होता है. दालचीनी के दो मुख्य प्रकार हैं - हल्की, मीठी और महंगी सीलोन दालचीनी, और मोटी, तीखी और सस्ती कैसिया दालचीनी.    स्रोत और उत्पादन पौधा :   दालचीनी का वैज्ञानिक नाम सिनामोमम वेरम है और यह लॉरेल परिवार का एक छोटा सदाबहार वृक्ष है.   छाल:   इसकी छाल को सुखाकर दालचीनी तैयार की जाती है. सूखने पर छाल स्वाभाविक रूप से मुड़कर डंडी (कैल) का रूप ले लेती है.   उपयोग और प्रकार स्वाद और सुगंध:   दालचीनी अपने मीठे और सुगंधित स्वाद के लिए प्रसिद्ध है.   खाद्य उपयोग:   इसका उपयोग विभिन्न मिठाइयों, पुडिंग और नमकीन व्यंजनों में किया जाता है.   औषधीय उपयोग:   प्राचीन काल से इसे खांसी, गले की खराश और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में इस्तेमाल किया जाता रहा है.   दो प्रकार: सीलोन दालचीनी:  यह हल्की, पतली, मीठी और महंगी होती है. ...

गाजर

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✍🏻राज कबीर ✍🏻 गाजर खाने से आँखें स्वस्थ रहती हैं और नज़र तेज़ होती है, दिल को बीमारी से बचाता है, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करता है, पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है, रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है, हड्डियों को मज़बूत करता है और वज़न घटाने में सहायक है. गाजर में विटामिन ए, सी और के, पोटेशियम, फाइबर और कई एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं.  गाजर खाने के मुख्य फायदे आँखों की रोशनी बढ़ाए: गाजर में भरपूर मात्रा मेंबीटा-कैरोटीन होता है, जो शरीर में जाकर विटामिन ए में बदलता है. यह आँखों को स्वस्थ रखने और विभिन्न समस्याओं जैसे मोतियाबिंद से बचाने में मदद करता है.  दिल के लिए फायदेमंद: गाजर में मौजूदएंटीऑक्सीडेंट्स और पोटेशियम हृदय को स्वस्थ रखने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करते हैं.  ब्लड प्रेशर कंट्रोल: गाजर में पोटेशियम होता है जो रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक होता है.  पाचन में सुधार : गाजर में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है, कब्ज को दूर करता है और पेट के स्वास्थ्य के लिए अच्छा है.  इम्...

एक कदम स्वास्थ्य की ओर

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✍️राजकबीर✍️ संतरे – Oranges संतरा विटामिन सी का एक श्रेष्ठ स्त्रोत है जो आपकी इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करने के साथ शरीर से फ्री रेडिकल्स को खत्म कर के गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, स्ट्रोक व दिल की बीमारियों के जोखिम को कम करता है। इसमें फोलेट व पोटेशियम की अच्छी मात्रा ब्लड प्रेशर को नियमित रखती है जिससे टाइप 2 डाईबिटीज़ से जुड़े हृदय रोगों से बचा जा सकता है। न सिर्फ़ संतरे बल्कि अन्य खट्टे फल जैसे अंगूर आदि भी विटामिन सी का अच्छा स्त्रोत है। संतरे की न्यूट्रिशनल वैल्यू (प्रति सरविंग): संतरे में मौजूद पोषण पोषक तत्त्व मात्रा कैलोरी 45 kcal फैट 0.1 ग्राम (0 ग्राम संतृप्त) कार्ब्स 11 ग्राम चीनी 09 ग्राम फाइबर 2.3 ग्राम प्रोटीन 0.9 ग्राम ग्लिसेमिक इंडेक्स 40 ग्लिसेमिक लोड 5

फाइबरयुक्त खाने से शरीर में ग्लूकोस

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फाइबरयुक्त खाने से शरीर में ग्लूकोस के अवशोषण को धीमा किया जा सकता है। इससे ब्लड शुगर नियंत्रित रहती है। कई फलों में फाइबर की मात्रा अधिक होती है, खासकर जो फल छिलका या गूदा के साथ खाए जाते हैं। साथ ही ज़्यादा फाइबर व पानी से भरपूर फल आपकी भूख को जल्दी शांत करके आपके वज़न को नियंत्रित रखने में मदद करते हैं। मोटापे के कम होंए से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, हाई कोलेस्ट्रॉल व हाई ब्लड प्रेशर को कम किया जा सकता है। अंगूर या Grapes अपने पोषण प्रोफ़ाइल के वजह से अंगूर फायदेमंद होते हैं। इनमें कॉपर या तांबा प्रचुर मात्रा में होता है जो ऊर्जा उत्पादन में मदद करता है। इसके अतिरिक्त इसमें विटामिन-के भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है। यह रक्त के थक्के को बनने में मदद करता है यानि घावों को ठीक करने में मदद करता है। इसी के साथ यह हड्डियों को स्वस्थ बनाए रखने में भी सहायता करता है। अंगूर में फाइबर भी अच्छी खासी मात्रा में आता है और यह आसानी से शुगर लेवल्स को नहीं बढ़ाता। इसे लो जीआई फूड में रखा जाता है और इसमें शुगर ना के बराबर होती है। कीवी  कीवी को ...

जानिए उन 6 फलों के बारे में, जिन्हें डायबिटीज रोगी भी बेफिक्र होकर खा सकते हैं

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@राजकबीर ✍️✍️ फलों की मिठास अगर आपको डरा रही है, तो निश्चिंत रहें। कुछ फल मीठे जरूर होते हैं, पर आपका शुगर लेवल नहीं बढ़ाते। बशर्ते कि आप इन्हें लिमिट में खाएं। कुछ फल ऐसे हैं, जो ब्लड शुगर लेवल कंट्रोल भी कर सकते हैं। डायबिटीज रोगी कच्चा या पका पपीता (Papaya) बेफिक्र होकर खा सकते हैं। पपीता एंटीऑक्सिडेंट और फाइबर से भरपूर होता है, जो शरीर में सेल डैमेज को रोकता है। यह विटामिन बी, फोलेट, पोटैशियम, मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स से भरपूर होता है। यह लो कैलोरी वाला फल है। डायबिटीज के मरीज इस फल के गूदे से लेकर बीज तक कोई भी हिस्सा खा सकते हैं। जामुन को इंडियन ब्लैकबेरी (Indian Blackberry) या ब्लैक प्लम (Black Plum) के रूप में भी जाना जाता है। जामुन में 82% पानी और 14.5% कार्बोहाइड्रेट होता है। इसमें सुक्रोज शुगर कम होताहै। स्टार्च को चीनी में बदलने की प्रक्रिया को फल में मौजूद जंबोसीन और जंबोलिन जैसे कंपाउंड धीमा कर देते हैं। ब्लड शुगर लेवल में अचानक स्पाइक्स से यह बचने में मदद करता है। कीवी (Kiwi) हाई फाइबर फ्रूट है। करते हैं। इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स(Glycemi...

एक कदम आयुर्वेद की ओर

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@राजकबीर ✍️✍️ *जामुन एक ऐसा वृक्ष जिसके अंग अंग में औषधि है।* अगर जामुन की मोटी लकड़ी का टुकडा पानी की टंकी में रख दे तो टंकी में शैवाल, हरी काई नहीं जमेगी और पानी सड़ेगा भी नहीं।  जामुन की इस खुबी के कारण इसका इस्तेमाल नाव बनाने में बड़ा पैमाने पर होता है। 🍇पहले के जमाने में गांवो में जब कुंए की खुदाई होती तो उसके तलहटी में जामून की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाता है जिसे जमोट कहते है।  🍇दिल्ली की निजामुद्दीन बावड़ी का हाल ही में हुए जीर्णोद्धार से ज्ञात हुआ 700 सालों के बाद भी गाद या अन्य अवरोधों की वजह से यहाँ जल के स्तोत्र बंद नहीं हुए हैं।  🍇भारतीय पुरातत्व विभाग के प्रमुख के.एन. श्रीवास्तव के अनुसार इस बावड़ी की अनोखी बात यह है कि आज भी यहाँ लकड़ी की वो तख्ती साबुत है जिसके ऊपर यह बावड़ी बनी थी। श्रीवास्तव जी के अनुसार उत्तर भारत के अधिकतर कुँओं व बावड़ियों की तली में जामुन की लकड़ी का इस्तेमाल आधार के रूप में किया जाता था। 🍇स्वास्थ्य की दृष्टि से विटामिन सी और आयरन से भरपूर जामुन शरीर में न केवल हीमोग्लोबिन की मात्रा को बढ़ाता। पेट दर्द, डायबि...