पंजाब में सिद्धू की ही तरह गैंगस्टर डिंपी को मारा गया था सिद्धू मूसेवाला के गाने में था इस गैंगस्टर का नाम, कहा जाता था पंजाब का पहला डॉन

साल 2021, मूसेवाला Moosetape नाम से एक म्यूजिक एलबम लाए. इसमें Malwa Block नाम से भी एक गाना था जिसमें गैंगस्टर का जिक्र था. गाना सुपरहिट रहा और Dimpy का इसमें नाम होना तब भी चर्चा में था.

पंजाब में गाने के बोल थे-
इंडस्ट्री चो थुक सलमान वर्गी
छह फुट्टा, चेनी 12 बोर वर्गा
नी टेडी पग बने डिंपी चांदभन वर्गी

इसका हिंदी में मतलब होता है - म्यूजिक इंडस्ट्री में सलमान खान जैसी प्रसिद्धि है. हाइट 6 फुट है, जैसे 12 बोर की बंदूक. थोड़ी टेड़ी पगड़ी पहनता है जैसे डिंपी चांदभन.

 चांदभन कौन था यह जानने के लिए आपको वक्त के पहिये को थोड़ा पीछे की तरफ मोड़ना होगा. साल था 1985. जब पंजाब में आतंकवाद चर्चा का मुद्दा था. क्रिमिनल्स गैंग्स का उन दिनों कोई खास अस्तित्व वहां नहीं था.
उसी साल फरीदकोट जिले के चांदभन गांव में रहने वाले प्रभजिंदर सिंह उर्फ डिंपी का नाम पहली बार बड़े लेवल पर सुना गया. यही गैंगस्टर आगे जाकर डिंपी चांदभन बन गया.साल 1985 में डिंपी का नाम पंजाब यूनिवर्सिटी (Panjab University) के छात्र नेता मक्खन सिंह के मर्डर में आया था, हालांकि, इस केस में उसे दोषी नहीं पाया गया. डिंपी खुद एक किसान परिवार से ताल्लुक रखता था. पिता का बचपन में निधन हो गया था और विधवा मां ने ही उसे पाला था.धीरे-धीरे क्राइम की दुनिया के जरिये डिंपी ने राजनीति में जाने वाली सीढ़ी भी तैयार कर ली थी.
कहा जाता है कि छात्र नेता डिंपी की Simranjeet Singh Mann से नजदीकियां थीं. वह अकाली दल के बड़े नेता थे. 1989 के वक्त में अकाली दल की पंजाब में अच्छी पकड़ भी थी. हालांकि बाद में मान ने अकाली दल से अलग होकर Shiromani Akali Dal (Amritsar) बना ली थी. लेकिन उस दौरान पंजाब में चुनाव बार-बार टल रहे थे और पुलिस की सख्ती बढ़ रही थी.
इस वजह से डिंपी अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा पीछे छोड़कर यूपी भाग गया. वहां मुख्तार अंसारी के साथ उसकी अच्छी उठ-बैठ हो गई थी. वहां से बाद में कर्नाटक भी गया था, जहां उसे गिरफ्तार किया गया.

Dimpy Chandbhan जल्दी अमीर बनना चाहता था
डिंपी का परिवार खेती करता था. फैमली में किसी का कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड नहीं था. वह खुद चंडीगढ़ पढ़ने ही आया था. लेकिन मर्डर केस में नाम आने के बाद उसकी जिंदगी जैसे दूसरे ट्रैक पर चली गई. इंडिया टुडे मैगजीन में साल 1997 में एक लेख छपा था. उसमें बताया गया कि डिंपी ने शुरुआत पंजाब के आतंकवादियों को हथियार सप्लाई करने से की थीफिर दिसंबर 1996 में उसकने पहली किडनैपिंग की. इसमें उसकी हिस्सेदारी 50 लाख रुपये थी. इनमें से 22 लाख रुपये डिंपी ने शराब का बिजनेस शुरू किया, वहीं 12 लाख दूसरे किसी काम में लगा दिये.

फिर डिंपी ने अपना गैंग बना लिया. इसमें तीन बेरोजगार लड़कों को लिया गया जो कि मिडिल क्लास परिवार से आए थे. डिंपी तब जल्द से जल्द बहुत सारे पैसा कमा लेना चाहता था. उसने कहा था, 'मुझे रॉयल लाइफ जीनी थी. एक दो बड़ी फिरौती से मुझे जल्दी पैसा बनाना था.'
इसी बीच उसे भनक लगी कि बेंगलुरू में एक बिजनसमैन बिना सिक्योरिटी के रहता है, नाम था निर्मल जयपुरिया (Nirmal Jaipuria). डिंपी ने निर्मल को किडनैप किया और पूरे 5 करोड़ की फिरौती मांगी. लेकिन फिरौती के लिए जब उसने फोन किया तो वह 40 मिनट तक कॉल पर रहा. इस दौरान पुलिसवाला बिना बताये उससे बात करता रहा. फिर क्या था, डिंपी धरा गया.बाद में उसे दिल्ली, फिर हरियाणा की जेल में शिफ्ट किया गया लेकिन फिर वह पुलिस कस्टडी से भागने में कामयाब हो गया. हालांकि, उसे बाद में पकड़ लिया गया था.

फिर 2004 में उसको बठिंडा जेल से रिहा किया गया था. लेकिन तबतक डिंपी क्राइम की दुनिया में बड़ा नाम बन चुका था. कहा जाता है कि उसकी रिहाई पर करीब 500 गाड़ियों का काफिला स्वागत के लिए पहुंचा था.

गैंगवार में ही मारा गया डिंपी, साथी का ही आया नाम

डिंपी का मर्डर भी गैंगवार में ही हुआ था. हमले का स्टाइल कुछ-कुछ मूसेवाला पर हुए हमले जैसा ही था. साल 2006 (7 जुलाई) को चंडीगढ़ में बाइक सवार बदमाशों ने मारा था. यह हत्याकांड सुखना लेक के पास हुआ था.
तब रात के 8 बजे करीब डिंपी अपनी दोस्त हरनीव कौर के साथ किसी क्लब से खाना खाकर लौट रहा था. जैसे ही उसकी नीली स्विफ्ट गाड़ी सुखना लेक के पास पहुंची, बाइक सवार बदमाशों ने गोलियां बरसा दीं. 48 साल के डिंपी के पेट और छाती में गोलियां लगी थीं, जिससे उसकी मौत हो गई थी. वहीं हरनीव कौर को जख्मी हालत में हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां उनकी जान बच गई थी.डिंपी के मर्डर का आरोप उसी के साथी जयविंदर सिंह रॉकी उर्फ रॉकी फाजिलका पर लगा था. हालांकि, बाद में वह भी इस केस में बरी हो गया था.

 

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